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िहंडन नदी शोध या ा
चार दशक बाद अंितम छोर पर
प ंचा िहंडन उ म का जल
िहंडन नदी अब के वल पि मी उ र देश के प रवत न के वल भौगोिलक नही,ं ब अपने अतीत की झलक िदखा रही थी-जैसे
न े पर बहती एक साधारण भौगोिलक धारा तीका क भी है-यह वह ण है जहाँ कृ ित कोई वृ अपने बचपन की त ीर
नही ंरह गई है। यह अब एक कठोर, असहज की सीमाएँ मानव स ता की अिनयंि त िदखा रहा हो।
और िनम म दप ण बन चुकी है-जो िवकास के गितिविधयो ं के सामने ढहने लगती ह । इसके लेिकन यह पिव ता लंबी नही ंचली।
खोखले िवरोधाभासो,ं उपे ा की भयावह बाद यह नदी सहारनपुर, मुज रनगर, 15 माच को िशवािलक े से शु ई यह
कीमत और मनु तथा निदयो ं के बीच टू ट शामली, मेरठ, बागपत, गािजयाबाद और या ा के वल एक रथ या ा नही ंथी, ब एक
चुके र ो ं की स ाई को बेरहमी से सामने अंततः गौतम बु नगर से होकर गुजरती है सामािजक और वै ािनक चेतना की या ा थी।
और लगभग 355 िकलोमीटर की या ा के रा ीय ह रत अिधकरण, शासिनक
रख देती है। हाल ही म स िहंडन नदी
बाद यमुना म िवलीन हो जाती है। अिधकारी, वै ािनक, िकसान, छा और
शोध या ा ने इस सच को िकसी अकादिमक
ामीण-सभी इस वाह का िह ा बने। यह
रपोट की तरह नही,ं ब एक जीिवत यह या ा के वल जल की नही ं है-यह मानव
के वल औपचा रक शु आत नही ं थी, ब
अनुभव की तरह सामने रखा-जहाँ िव ान, ह ेप की एक लंबी और जिटल कथा है।
उस कठोर स ाई से टकराने की शु आत थी
पीड़ा और चेतावनी एक ही वाह म बहते इसके िकनारो ं पर बसी आबादी, फै ले उ ोग,
िदखाई िदए। खेतो ं की ह रयाली और बढ़ते शहर-सब इस िजसे लंबे समय से अनदेखा िकया जा रहा था।
नदी से जुड़े ह , लेिकन अब यह जुड़ाव संर ण अगले पाँच िदनो ं म लगभग 400 िकलोमीटर
कभी यह नदी िशवािलक की शांत और हरे-
का नही,ं दोहन का तीक बन चुका है। कभी का े इस या ा का सा ी बना। लेिकन हर
भरे जंगलो ंम ज लेती थी, जहाँ वषा से भीगी
इसे पंचतीथ कहा गया, कभी हरनंदी के नाम पड़ाव पर जो सामने आया, वह एक जैसा था-
ढलानो ं पर प रो ं से टकराती धाराएँ जीवन
से पूजा गया, लेिकन आज इसकी पहचान एक नदी का पतन। उ म से मा 40 िकलोमीटर
का संगीत रचती थी।ं यहाँ नदी कोई एक र
ऐसी नदी की है जो ृित और संकट के बीच बाद ही कई ानो ंपर घुिलत ऑ ीजन शू
धारा नही,ं ब जंगलो ंकी साँसो ंसे बनी एक
झलू रही है। हो चुकी थी। वे ान अब “डेड ज़ोन” बन चुके
जीिवत व ा थी-छोटे-छोटे झरनो,ं मौसमी
थे-जहाँ जीवन की कोई संभावना नही ं बची
वाहो ं और ाकृ ितक जल ोतो ं का जाल। िहंडन नदी शोध या ा इस असहज स ाई को
थी।
इ ी ं म से लगभग सौ फीट ऊँ चाई से िगरने उजागर करती है िक यह नदी अब के वल
वाली एक धारा, िजसे ानीय लोग “बरसाती मानसून म ही जीिवत िदखाई देती है। शेष इन े ो ं म जल गुणव ा को बेहतर बनाने की
धारा” कहते ह , इस नदी की पहचान बनती है। समय यह एक ऐसी नाली म बदल जाती है ापक संभावनाएँ िदखाई देती ह । कु छ
अपने उ म म िहंडन इतनी िनम ल थी िक वह िजसम िबना उपचा रत सीवेज, औ ोिगक ानो ं पर पानी के रंग और TDS र 600 से
के वल जल नही,ं ब जीवन का माण थी- अपिश और शहरी कचरा लगातार बहता 1600 ppm तक दज होना यह दशा ता है िक
घुिलत ऑ ीजन से भरपूर, पीने यो और रहता है। उसका उ म िजतना पिव है, िनयिमत िनगरानी, बेहतर शोधन व ा
जलीय जीवो ंसे जीवंत। उसकी वत मान ित उतनी ही दू िषत और और दू षण िनयं ण के भावी उपायो ं से
पीड़ादायक है। ित म उ ेखनीय सुधार लाया जा सकता
लेिकन निदयाँ के वल ज नही ं लेती-ं वे या ा
यह या ा के वल एक तीक नही ं थी, ब है। ितलवाड़ा जैसे मह पूण संगम ल, जहाँ
करती ह , और अपनी या ा म सब कु छ
एक चलते-िफरते वै ािनक योग की तरह िहंडन यमुना म िमलती है, नदी पुनज वन और
बदलती जाती ह ।
थी। 14 माच को जब इसके उ म से 50 लीटर संर ण के िलए िवशेष यासो ं का क बन
िशवािलक के जंगलो ं से िनकलकर जैसे ही जल एक िकया गया, तो योगशाला सकते ह ।
िहंडन मैदानी े ो ं म वेश करती है, उसका परी णो ं ने एक लगभग भूला आ सच सामने लेिकन यह संकट के वल सतही जल तक
प अचानक बदल जाता है। महज पाँच रखा-यह जल अब भी शु था, TDS लगभग सीिमत नही ंहै। यह अब भूजल की परतो ंम भी
िकलोमीटर के भीतर ही वह 300 से 500 100 ppm और घुिलत ऑ ीजन पया
उतर चुका है। कई गाँवो ं म 250 से 350 फीट
मीटर चौड़े िव ार म फै ल जाती है। यह मा ा म मौजूद थी। यह वह ण था जहाँ नदी तक का पानी भी दू िषत पाया गया है।
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