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जल अब एक सामा अिधकार नही,ं भी ह जो उ ीद की ह ी िकरण बनते ह । आ, चचा एँ ईं और नदी एक बार िफर
ब एक दुल भ संसाधन बन गया है िजसे बागपत म अपर गंगा नहर का पानी िमलकर के वल भूगोल नही ंब िज ेदारी बन गई।
पाने के िलए गहराई म जाना पड़ता है- कु छ दू री तक नदी म जीवन लौटाता है, लेिकन
अंततः यह समझना आव क है िक निदयाँ
शा क और तीका क दोनो ं प म । यह पुनज वन अ कािलक होता है। जैसे ही
अचानक नही ंमरती-ं उ धीरे-धीरे भुला िदया
नदी गािजयाबाद और आगे गौतम बु नगर
ा के ि कोण से यह े िवशेष ान जाता है। और यिद उ बचाना है, तो उ
प ँचती है, दू षण िफर से हावी हो जाता है
और सुधार की संभावनाएँ रखता है। नदी के वल संरचना नही,ं ब जीिवत अ के
और ऑ ीजन र पुनः शू हो जाता है।
िकनारे बसे समुदायो ं म ा से जुड़ी प म ीकार करना होगा। आज िहंडन एक
चुनौितयो ं को देखते ए जल, बेहतर इस या ा का सबसे बड़ा िवरोधाभास यही है- ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ वह न पूरी तरह
ा सेवाओ ं और िनयिमत िनगरानी को समाज एक ओर नदी के िवनाश को ीकार जीिवत है, न पूरी तरह मृत। वह एक अिनि त
मजबूत करने की आव कता है। सम त कर चुका है, लेिकन दू सरी ओर उसके ित अव ा म है-जो या तो पुनज की ती ा
यासो,ं जन-जाग कता और भावी दू षण एक गहरी भावना क ृित अभी भी जीिवत कर रही है या अंितम पतन की।
िनयं ण के मा म से न के वल पया वरणीय है। लोग आज भी उस नदी को याद करते ह िहंडन नदी शोध या ा के वल एक नदी की
ित म सुधार लाया जा सकता है, ब िजसम वे ान करते थे, जहाँ पानी इतना साफ कहानी नही ं है-यह स ता की आ ा का
ानीय समुदायो ं के ा और जीवन- था िक नदी की तलहटी तक िदखाई देती थी। परी ण है। यह सवाल छोड़ती है: ा िवकास
गुणव ा को भी बेहतर बनाया जा सकता है। और िफर भी, इस िनराशा के भीतर एक और कृ ित साथ चल सकते ह , या हमेशा एक
संभावना भी है। सरकारी योजनाएँ , सीवेज को दू सरे की बिल देनी होगी? इस का
इसके पीछे कारण ह -उ ोगो ं का िबना
उपचा रत अपिश , शहरो ं का सीधा सीवेज ट ीटम ट ांट्स और जल आपूित यास इस उ र के वल िहंडन का भिव नही ंतय करेगा,
बात का संके त ह िक बदलाव संभव है-लेिकन ब उन सभी निदयो ं का भी, जो चुपचाप
वाह और कृ िष रसायनो ं का अिनयंि त
वे अभी पया नही ं ह । इस या ा की सबसे हमारे समय के भीतर अपनी अंितम साँसो ं की
उपयोग। यह एक ऐसी ृंखला है िजसम हर
बड़ी उपल यह रही िक इसने नदी को िफर ओर बढ़ रही ह ।
कड़ी िज ेदारी से भागती है और पूरा भार
से समाज के सामने खड़ा कर
नदी पर डाल िदया जाता है। िदया। हजारो ं
लोग इस संवाद का िह ा बने, वृ ारोपण
िफर भी, इस अंधकार के बीच कु छ ण ऐसे
रमन कांत
अ , भारतीय नदी प रषद ्
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