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िकया जाए, तािक नदी पर पड़ने वाला दबाव िनगरानी और शासिनक इ ाश के साथ नमािम गंगे की अब तक की गित एक
कम हो और गंगा अपने ाकृ ितक, और पया वरणीय चुनौितयो ं पर भावी ढंग से काम मह पूण संदेश देती है—जब नीित,
जीवनदायी प की ओर लौट सके । िकया जा सकता है। िफर भी गंगा की पूण तकनीक, िनगरानी और जनभागीदारी
एक िदशा म आगे बढ़ , तो वष पुरानी
एक सकारा क शु आत, िजसे आगे ता की या ा अभी जारी है। औ ोिगक
पया वरणीय सम ाओ ं म भी बदलाव
बढ़ाना है अपिश के साथ-साथ शहरी सीवेज, ठोस
संभव है। गंगा की होती धारा के वल
गंगा म औ ोिगक दू षण का लगभग 60 कचरा और बढ़ते शहरी दबाव जैसी चुनौितयो ं
एक सरकारी काय म की सफलता नही,ं
ितशत कम होना िनि त प से पर भी लगातार ान देना होगा। अब
ब आने वाली पीिढ़यो ं के िलए
उ ाहजनक उपल है। यह दशा ता है िक आव कता इस बात की है िक जाजमऊ जैसे
जल और पया वरण की उ ीद का
नीित, आधुिनक बुिनयादी ढांचे, िनयिमत सफल ह ेपो ं को अ दू षण- भािवत
वाह है।
े ो ंम भी तेजी से दोहराया जाए।
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