Page 35 - Patrika 44-Apr-Jun-26 - Sep-1.cdr
P. 35

िनम लता की ओर लौटती गंगा की धारा,


                                     दू षण पर असरदार लगाम



             भारत म  गंगा का मह  पया वरण के  दायरे से  आव क  ह  ेपो ं को   ाथिमकता  देने  म   संयं    टेन रयो ं   से िनकलने  वाले  ोिमयम
             कही ं बड़ा है। यह आ ा का क    है, स ता  मह पूण  भूिमका िनभाई है। यह  ि कोण  जैिवक   दू षको ं और  रंगयु   अपिश   को
             की  धुरी  है  और  इसके   िवशाल  बेिसन  पर  बताता  है  िक  नदी  संर ण  के वल  सफाई  उपचा रत करने म  मह पूण  भूिमका िनभा

             िनभ र  करोड़ो ं लोगो ं के   िलए  जीवन  तथा  अिभयान  नही,ं  ब    िव ान,  तकनीक,
                                                                                   रहा है। इससे यह संदेश भी मजबूत  आ है
             आजीिवका का आधार भी। यही कारण है िक    शासन और उ ोगो ं की साझा िज ेदारी से   िक औ ोिगक िवकास और पया वरण संर ण
             गंगा  की  सेहत  म   आने  वाला  कोई  भी   जुड़ा दीघ कािलक  यास है।
                                                                                   को  पर र  िवरोधी  मानने  की  आव कता
             सकारा क बदलाव रा ीय मह  रखता है।   जाजमऊ म  बदलाव की नई कहानी         नही;ं सही तकनीक और िज ेदार  व ा के

             हाल के  आंकड़े इसी बदलाव की एक अहम
                                                गंगा  दू षण के   खलाफ लड़ाई म  कानपुर का   मा म से दोनो ंके  बीच संतुलन संभव है।
             त ीर पेश करते ह । नमािम गंगे काय  म
                                                जाजमऊ टेनरी बे  लंबे समय से सबसे   सीसामऊ  नाले  का  अवरोधन-एक
             के   तहत  2017  से  गंगा  म   प ंचने  वाले
                                                चुनौतीपूण   े ो ं म  िगना जाता रहा है। चमड़ा
             औ ोिगक  द ू षण के  भार म  लगभग 60                                     िनणा यक कदम
                                                उ ोगो ंसे िनकलने वाला रासायिनक अपिश
              ितशत  की  कमी  दज   की  गई  है।  यह                                  ककानपुर म  गंगा की   ता की िदशा म
                                                गंगा की मु धारा पर औ ोिगक  दू षण के
             आंकड़ा िसफ    दू षण म  िगरावट नही ंबताता,                              िससामऊ नाले का अवरोधन भी एक बड़ी
                                                बड़े  ोतो ं म  शािमल था। इसी कारण यहां
             ब    उस  बदलाव  की  आहट  भी  देता  है                                 उपल    है।  यह  नाला  कभी  लगभग  140
                                                िकए गए ह  ेपो ं को नमािम गंगे की सबसे
             िजसम   गंगा  की  धारा  अपने  पुराने  िनम ल                            एमएलडी  अनुपचा रत  सीवेज  और
                                                मह पूण  उपल  यो ं म  माना जा सकता है।
               प की ओर िफर से रा ा बना रही है।                                     औ ोिगक अपिश  सीधे गंगा म  प ंचाता
                                                जाजमऊ  े  म  कॉमन ए ुएं ट ट  ीटम ट
             इस उपल   का मह  तब और    होता                                         था। इसके   वाह को रोककर उपचार  व ा
                                                 ांट  (सीईटीपी)  की   ापना,  िससामऊ
             है, जब जैिवक ऑ ीजन मांग यानी बीओडी                                    से जोड़ना नदी म   दू षण घटाने की िदशा म
                                                नाले  का  अवरोधन,  नगरपािलका  सीवेज
             (BOD)  से  जुड़े  आंकड़ो ं को  देखा  जाए।                               िनणा यक ह  ेप सािबत  आ है। ऐसे कदम
                                                शोधन  व ा का िव ार तथा बड़ी टेन रयो ं
             अ िधक  दू षण फै लाने वाले उ ोगो ंसे आने
                                                के  िलए कड़े अपिश -िन ारण मानको ं का   हम  यह समझाते ह  िक गंगा की   ता का
             वाला बीओडी भार वष  2017 म  लगभग 26
                                                                                   रा ा उसके  पूरे जल-तं  को    बनाने से
                                                पालन—इन सभी पहलो ं ने िमलकर  दू षण
             टन  ितिदन था, जो 2024 म  घटकर 10.75
                                                                                   होकर  गुजरता  है।  वा िवक  बदलाव  तब
                                                िनयं ण की नई संरचना तैयार की है।
             टन  ितिदन रह गया। यह िगरावट बताती है
                                                                                   संभव  है,  जब  नालो,ं   उ ोगो ं और  शहरी
             िक  स   िनगरानी,  आधुिनक  शोधन     िवशेष  प से 20 एमएलडी  मता वाला
                                                                                   अपिश  के   ोतो ंको  भावी ढंग से िनयंि त
             तकनीक और  भावी िनयामक  व ा के      जाजमऊ सीईटीपी अब काय शील है। यह
             संयु   यास अब जमीन पर प रणाम देने

             लगे ह ।
             िनगरानी से नतीजो ंतक

             नमािम  गंगे  की  सफलता  का  एक   मुख
             आधार के वल प रयोजनाओ ं का िनमा ण नही,ं
             ब   िनरंतर िनगरानी और जवाबदेही की
              व ा भी है। क   ीय  दू षण िनयं ण बोड

             उ राखंड, उ र  देश, िबहार, झारखंड और
             पि म बंगाल म  गंगा की मु धारा पर 112
             जल गुणव ा िनगरानी  ेशनो ं के  मा म
             से नदी के   ा  पर नजर रख रहा है। इस

              व ा ने  दू षण के   मुख  ोतो ंकी पहचान
             करने,   उनकी गंभीरता    समझने        और
                                                                                                               35
   30   31   32   33   34   35   36   37   38   39   40