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िनम लता की ओर लौटती गंगा की धारा,
दू षण पर असरदार लगाम
भारत म गंगा का मह पया वरण के दायरे से आव क ह ेपो ं को ाथिमकता देने म संयं टेन रयो ं से िनकलने वाले ोिमयम
कही ं बड़ा है। यह आ ा का क है, स ता मह पूण भूिमका िनभाई है। यह ि कोण जैिवक दू षको ं और रंगयु अपिश को
की धुरी है और इसके िवशाल बेिसन पर बताता है िक नदी संर ण के वल सफाई उपचा रत करने म मह पूण भूिमका िनभा
िनभ र करोड़ो ं लोगो ं के िलए जीवन तथा अिभयान नही,ं ब िव ान, तकनीक,
रहा है। इससे यह संदेश भी मजबूत आ है
आजीिवका का आधार भी। यही कारण है िक शासन और उ ोगो ं की साझा िज ेदारी से िक औ ोिगक िवकास और पया वरण संर ण
गंगा की सेहत म आने वाला कोई भी जुड़ा दीघ कािलक यास है।
को पर र िवरोधी मानने की आव कता
सकारा क बदलाव रा ीय मह रखता है। जाजमऊ म बदलाव की नई कहानी नही;ं सही तकनीक और िज ेदार व ा के
हाल के आंकड़े इसी बदलाव की एक अहम
गंगा दू षण के खलाफ लड़ाई म कानपुर का मा म से दोनो ंके बीच संतुलन संभव है।
त ीर पेश करते ह । नमािम गंगे काय म
जाजमऊ टेनरी बे लंबे समय से सबसे सीसामऊ नाले का अवरोधन-एक
के तहत 2017 से गंगा म प ंचने वाले
चुनौतीपूण े ो ं म िगना जाता रहा है। चमड़ा
औ ोिगक द ू षण के भार म लगभग 60 िनणा यक कदम
उ ोगो ंसे िनकलने वाला रासायिनक अपिश
ितशत की कमी दज की गई है। यह ककानपुर म गंगा की ता की िदशा म
गंगा की मु धारा पर औ ोिगक दू षण के
आंकड़ा िसफ दू षण म िगरावट नही ंबताता, िससामऊ नाले का अवरोधन भी एक बड़ी
बड़े ोतो ं म शािमल था। इसी कारण यहां
ब उस बदलाव की आहट भी देता है उपल है। यह नाला कभी लगभग 140
िकए गए ह ेपो ं को नमािम गंगे की सबसे
िजसम गंगा की धारा अपने पुराने िनम ल एमएलडी अनुपचा रत सीवेज और
मह पूण उपल यो ं म माना जा सकता है।
प की ओर िफर से रा ा बना रही है। औ ोिगक अपिश सीधे गंगा म प ंचाता
जाजमऊ े म कॉमन ए ुएं ट ट ीटम ट
इस उपल का मह तब और होता था। इसके वाह को रोककर उपचार व ा
ांट (सीईटीपी) की ापना, िससामऊ
है, जब जैिवक ऑ ीजन मांग यानी बीओडी से जोड़ना नदी म दू षण घटाने की िदशा म
नाले का अवरोधन, नगरपािलका सीवेज
(BOD) से जुड़े आंकड़ो ं को देखा जाए। िनणा यक ह ेप सािबत आ है। ऐसे कदम
शोधन व ा का िव ार तथा बड़ी टेन रयो ं
अ िधक दू षण फै लाने वाले उ ोगो ंसे आने
के िलए कड़े अपिश -िन ारण मानको ं का हम यह समझाते ह िक गंगा की ता का
वाला बीओडी भार वष 2017 म लगभग 26
रा ा उसके पूरे जल-तं को बनाने से
पालन—इन सभी पहलो ं ने िमलकर दू षण
टन ितिदन था, जो 2024 म घटकर 10.75
होकर गुजरता है। वा िवक बदलाव तब
िनयं ण की नई संरचना तैयार की है।
टन ितिदन रह गया। यह िगरावट बताती है
संभव है, जब नालो,ं उ ोगो ं और शहरी
िक स िनगरानी, आधुिनक शोधन िवशेष प से 20 एमएलडी मता वाला
अपिश के ोतो ंको भावी ढंग से िनयंि त
तकनीक और भावी िनयामक व ा के जाजमऊ सीईटीपी अब काय शील है। यह
संयु यास अब जमीन पर प रणाम देने
लगे ह ।
िनगरानी से नतीजो ंतक
नमािम गंगे की सफलता का एक मुख
आधार के वल प रयोजनाओ ं का िनमा ण नही,ं
ब िनरंतर िनगरानी और जवाबदेही की
व ा भी है। क ीय दू षण िनयं ण बोड
उ राखंड, उ र देश, िबहार, झारखंड और
पि म बंगाल म गंगा की मु धारा पर 112
जल गुणव ा िनगरानी ेशनो ं के मा म
से नदी के ा पर नजर रख रहा है। इस
व ा ने दू षण के मुख ोतो ंकी पहचान
करने, उनकी गंभीरता समझने और
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