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गंगा पुनज वन की नई धारा:
उपचा रत जल से सश होती जल-समृ
भारत आज जल बंधन के े म एक मह पूण कदम है। उ राखंड की अ णी समाधान की िदशा म एक वहा रक और
मह पूण प रवत न के दौर से गुजर रहा है, पहल के साथ-साथ उ र देश, िबहार और दू रदश कदम िस हो रही है।
जहाँ पारंप रक सोच से आगे बढ़कर नवाचार पि म बंगाल जैसे रा ो ं के यास यह दशा ते जल बंधन म सोच का सकारा क
और रता पर बल िदया जा रहा है। इस ह िक गंगा बेिसन म एक समेिकत और भावी बदलाव
प रवत न का नेतृ नमािम गंगे िमशन कर जल-नीित ढाँचा िवकिसत हो रहा है। यह
यह पूरी पहल जल बंधन की पारंप रक सोच
रहा है, जो के वल गंगा की ता तक
ि कोण भारत को सकु लर इकॉनमी की म एक सकारा क बदलाव का तीक है।
सीिमत न रहकर जल-सुर ा, पा र ितक
िदशा म भी सश बना रहा है। साथ ही, यह अब जल को के वल उपभोग की व ु नही,ं
संतुलन और सतत िवकास को सम प म
मॉडल अ नदी बेिसनो ं के िलए भी एक ब एक पुनच ि त, पुनज िवत और साझा
आगे बढ़ा रहा है। बढ़ती जनसं ा, ती
ेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है। संसाधन के प म देखा जा रहा है। नमािम
शहरीकरण और औ ोिगक िव ार के बीच
औ ोिगक े म िज ेदार सहभािगता गंगे िमशन ने इस सोच को जन-आंदोलन का
यह िमशन एक सम त और दीघ कािलक
औ ोिगक े म भी नमािम गंगे िमशन के प िदया है, िजसम सरकार, उ ोग, शहरी
समाधान ुत करता है। इसी संदभ म
सकारा क भाव प से िदखाई दे रहे िनकायो ं के साथ-साथ आम नाग रक भी
उपचा रत जल का सुरि त पुन: उपयोग एक सि य प से भागीदारी िनभा रहे ह । इस
ह । कानपुर त िबनगवां सीवेज ट ीटम ट
सश और दू रदश पहल बनकर उभरा है, प रवत न ने जल के ित लोगो ं की सोच को
ांट इस प रवत न का एक उ ृ उदाहरण
जो जल बंधन की िदशा को नई प रभाषा दे अिधक िज ेदार और संवेदनशील बनाया है,
है, जहाँ आधुिनक तकनीक के मा म से
रहा है। िजससे संर ण और पुन: उपयोग को बढ़ावा
अपिश जल का उपचार कर उसे पुन:
गंगा बेिसन म “वे टू वे ” की नई सोच िमल रहा है। साथ ही, यह सम ि कोण
उपयोग के यो बनाया जा रहा है। पनकी
गंगा बेिसन, जो भारत की सां ृ ितक, संसाधनो ं के संतुिलत उपयोग, पया वरण
तापीय िवद् युत संयं सिहत कई उ ोग अब
आिथ क और पा र ितक धुरी है, अब जल संर ण और सतत िवकास के ल ो ं को ा
उपचा रत जल का उपयोग कर रहे ह , िजससे
बंधन के नवाचारो ं का क बन रहा है। करने म भी मह पूण भूिमका िनभा रहा है, जो
वे न के वल जल संर ण म योगदान दे रहे ह ,
नमािम गंगे के तहत अपिश जल को अब ब अपने संचालन को भी अिधक िटकाऊ आने वाली पीिढ़यो ं के िलए सुरि त जल
के वल िन ारण यो नही,ं ब एक भिव सुिनि त करता है।
बना रहे ह । यह प रवत न उ ोगो ं को जल
मू वान संसाधन के प म देखा जा रहा है। आगे की राह: ािय और जनभागीदारी
उपभो ा से जल बंधक के प म ािपत
“वे टू वे ” की अवधारणा को वहार म कर रहा है। इसके प रणाम प उ ोगो ं म भिव की िदशा न के वल आशाजनक है,
उतारते ए उपचा रत जल का उपयोग कृ िष, पया वरणीय उ रदािय और संसाधन द ता ब एक सु ढ़ और दीघ कािलक प रवत न
उ ोग, शहरी ह रत े ो,ं िनमा ण काय और
की भावना भी मजबूत हो रही है। की संभावनाओ ं से भरपूर है, जहाँ उपचा रत
अ गैर-पेय उ े ो ं म बढ़ाया जा रहा है।
शहरी र पर ि या यन की सश जल के पुन: उपयोग को ापक और भावी
इससे न के वल गंगा म जाने वाले दू षण म
पहल बनाने के िलए मजबूत सं ागत ढाँचे का
कमी आई है, ब भूजल और मीठे जल
शहरो ं म भी उपचा रत जल के पुन: उपयोग िनरंतर सु ढ़ीकरण आव क होगा, तािक
ोतो ं पर बढ़ते दबाव को भी भावी प से
को लेकर उ ेखनीय गित हो रही है। क , रा और ानीय िनकायो ं के बीच
कम िकया जा रहा है। यह पहल सतत िवकास
आगरा, यागराज, वाराणसी और कानपुर बेहतर सम य ािपत हो सके । उ त
और संसाधनो ं के कु शल उपयोग की िदशा म
जैसे शहर िसटी-लेवल रीयूज ए न ान के तकनीकी समाधानो—ं जैसे ाट मॉिनट रंग
एक मह पूण कदम सािबत हो रही है।
मा म से इस पहल को जमीनी र पर लागू िस म, रयल-टाइम गुणव ा परी ण और
नीितगत सु ढ़ता और सम त यास कर रहे ह । इन योजनाओ ं के तहत उपचा रत ऊजा -कु शल उपचार संयं —का िव ार इस
इस सकारा क प रवत न को नीितगत र जल की उपल ता, िवतरण णाली, मांग पहल की द ता और िव सनीयता को और
पर भी मजबूत आधार ा आ है। जल क ो ं की पहचान और िनगरानी तं को बढ़ाएगा। इसके साथ ही, जनभागीदारी इस
श मं ालय के नेतृ म क , रा और सु व त िकया जा रहा है। यागराज और प रवत न की सबसे मह पूण कड़ी बनी
ानीय िनकायो ं के बीच बेहतर सम य आगरा जैसे शहरो ं के यास यह दशा ते ह िक रहेगी, ोिं क नाग रको,ं उ ोगो ंऔर सं ानो ं
ािपत आ है। िविभ रा ो ं ारा ानीय र पर भी जल बंधन को लेकर म उपचा रत जल के ित िव ास और
उपचा रत जल पुन: उपयोग नीितयो ं का जाग कता और उ रदािय लगातार बढ़ ीकाय ता बढ़ाए िबना इसके पूण लाभ ा
िनमा ण और ि या यन इस िदशा म एक रहा है। यह पहल शहरी जल संकट के नही ंहो पाएं गे। इसिलए ापक
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