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ता पखवाड़ा 2026:
जन-जाग कता से जन-आंदोलन तक
गंगा के वल बहता आ जल नही ं है—यह चला यह अिभयान के वल सफाई तक सीिमत अवसर नही,ं ब एक िनरंतर चलने वाली
भारत की ृितयो,ं सं ारो ं और संवेदनाओ ं नही ं रहा—यह एक जाग कता की लहर िज ेदारी है—ठीक उसी तरह जैसे नदी का
की जीवंत धारा है। इसकी लहरो ं म इितहास बनकर उभरा, िजसने लोगो ं के मन और वाह कभी थमता नही।ं संदेश िदया गया
की गूंज है, िकनारो ं पर स ताओ ं की कहानी वहार दोनो ं को श िकया। गंगा तटो ं की िक कु छ िदनो ं की सफाई से ायी प रवत न
है और वाह म आ ा की अनंत िनरंतरता। सफाई के साथ-साथ िद ी म यमुना िकनारे संभव नही ं है। इसके िलए ज री है
सिदयो ं से यह नदी जीवन को िदशा देती आई आयोिजत गितिविधयो ं ने इस पहल को जाग कता की िनरंतर धारा, वहार म
है-कभी आजीिवका बनकर, तो कभी भौगोिलक सीमाओ ं से परे ले जाकर एक
ायी बदलाव और सामूिहक िज ेदारी का
आ ा क सहारा बनकर। लेिकन समय ापक र िदया।
भाव। जल संर ण और हर बूंद के मह को
की बदलती धारा के साथ अब यह हो यह के वल ानो ं का िव ार नही ं था, ब
रेखांिकत करते ए इस अिभयान ने
चुका है िक गंगा का संर ण के वल ा का सोच का िव ार भी था-नदी चाहे गंगा हो या
पया वरणीय सोच को के वल िवचारो ं तक
िवषय नही,ं ब हमारे सामूिहक दािय यमुना, संर ण का भाव एक ही है। सबसे
सीिमत नही ं रखा, ब उसे दैिनक जीवन
की कसौटी है। इसी सोच को जन-श से ेरणादायक पहलू रहा ानीय समुदायो,ं
का िह ा बनाने का यास िकया।
जोड़ने का साथ क यास है—‘नमािम गंगेʼ छा ो ं और युवाओ ं की उ ाही भागीदारी।
और उसके अंतग त आयोिजत ‘ ता उनकी ऊजा , उनकी ितब ता और उनका युवा श : प रवत न की अ द ू त
पखवाड़ा 2026ʼ। यह पहल के वल एक िव ालयो,ं महािव ालयो ं और िव िव ालयो ं
जुड़ाव इस अिभयान म नई जान भरते िदखे।
काय म नही,ं ब जाग क समाज की से जुड़े छा ो ं एवं अ ापको ं ने इस अिभयान
ऐसा तीत आ मानो ता अब के वल
उस उभरती चेतना का तीक है, जो गंगा और को एक
एक िवचार या काय म नही,ं ब समाज के
उसकी सहायक निदयो ं के पुनज वन के
िदलो ं म बसता आ एक साझा संक बन नई ऊजा दान की। िविभ काय मो,ं
संक को जन-आंदोलन म बदलने की
चुकी है—एक ऐसा संक , जो िनरंतर बहती संवादो ं और रचना क पहलो ं के मा म से
िदशा म अ सर है।
धारा की तरह आगे बढ़ने को तैयार है। उ ोनं े युवाओ ं को इस िदशा म न के वल
एक अिभयान से बढ़कर: जन-आंदोलन
इव ट नही,ं सतत ि या का संदेश जाग क िकया, ब उ सि य
की शु आत
इस अिभयान की सबसे बड़ी सफलता यही भागीदारी के िलए े रत भी िकया।
16 से 31 माच 2026 के बीच आयोिजत
रही िक इसने ता को कु छ िदनो ं तक प रणाम प, युवा अब के वल दश क भर
ता पखवाड़ा ने यह सािबत कर िदया िक
सीिमत रहने वाले ‘इव टʼ की प रिध से बाहर नही ं रहे—वे प रवत न के सश वाहक
जब इरादे हो ं और यास सामूिहक, तो
िनकालकर एक सतत जीवन-शैली के प म बनकर उभरे ह ।
एक साधारण पहल भी ापक जन-आंदोलन
ािपत करने की िदशा िदखाई। यह पहल छा ो ं ारा आयोिजत िविवध
का प ले सकती है। गंगा बेिसन के पाँच
मानो यह याद िदलाने आई िक सफाई कोई गितिविधयाँ—जैसे ता अिभयान,
रा ो ंम िजला गंगा सिमितयो ंके नेतृ म
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