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ेरणा के : बदलाव की जीवंत कहानी िणक नही ंरहता, ब ायी प ले लेता है। ये िक सही िदशा, ढ़ इ ाश और सामूिहक
अिभयान के दौरान िविभ ानो ं पर िकए गए उन अनिगनत संभावनाओ ं की ओर संके त यास से िकसी भी चुनौती का समाधान संभव है।
यासो ं के और फोटो ाफ के वल रकॉड भर करते ह , जहाँ अभी ऐसे यासो ं की शु आत होनी ‘नमािम गंगेʼ के वल एक सरकारी योजना नही,ं
ब एक साझा संक है—एक ऐसा यास जो
नही ं रहे—वे एक जीवंत ेरणा के प म उभरे। बाकी है। वे एक माग दश क की तरह ह —यह
हम हमारी िज ेदा रयो ं का बोध कराता है और
हर त ीर म एक कहानी थी—समप ण की, िदखाते ए िक अगर इ ा हो और साथ हो, तो हर
एक , सुरि त तथा सतत भिव की ओर
सामूिहक यास की और उस िव ास की िक ान पर बदलाव की यह कहानी दोहराई जा
अ सर करता है। गंगा की ता म ही देश का
बदलाव संभव है। इन झलिकयो ं ने यह सश सकती है। भिव िनिहत है—और इस िदशा म उठाया गया
संदेश िदया िक जबसमुदाय एकजुट होकर िकसी िन ष : एक साझा संक की धारा हर कदम एक नई उ ीद, एक नई शु आत की
उ े के िलए खड़ा होता है, तो प रवत न के वल ता पखवाड़ा 2026 ने यह कर िदया है कहानी िलखता है।
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