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नवाचार  आधा रत    ुितयाँ,  रचना क   श  , जो के वल िवचार नही,ं ब   प रवत न की   तकनीक ही पया   नही।ं  इन उपायो ंकी वा िवक
             जाग कता काय  म—ने यह िदखाया िक     िदशा तय करने का साहस भी रखती है।   सफलता तब ही संभव है, जब समाज उ   समझे,
               ता  को  अपनाने  के   िकतने  नए  और   तकनीक और समाज: संतुलन की अिनवाय ता गंगा    ीकार करे और अपने  वहार म  उतारे। यिद
              भावी तरीके  हो सकते ह । उनकी सोच और                                  तकनीक समाधान का ढांचा है, तो सामािजक
                                                के  संर ण की राह म  आधुिनक तकनीक   एक










































































             उ ाह  ने  इस  अिभयान  म   ताजगी  और   मजबूत आधार  दान करती ह —चाहे वह सीवेज  चेतना उसकी आ ा है।   ता पखवाड़ा ने इसी
             नवीनता का संचार िकया।              ट ीटम ट   ांट  हो,ं   अपिश    बंधन  की  उ त   संतुलन को सु ढ़ करने का काय  िकया है। इसने
                                                 णािलयाँ या जल के  पुनः  उपयोग की नीितयाँ। ये
             िन ंदेह,  यही  युवा  श    भिव   म   इस                                यह      िकया  िक  नीितयाँ  और  योजनाएँ   तभी
                                                सभी  यास गंगा को    और पुनज िवत करने
             आंदोलन  की  िनरंतरता  और  सफलता  की                                    भावी बनती ह , जब वे लोगो ं के  जीवन का िह ा
                                                की िदशा म  अ ंत मह पूण  ह । िक ु के वल  बन —जब  समाज  के वल  दश क  नही,ं  ब
             सबसे बड़ी आधारिशला बनेगी—एक ऐसी
                                                                                   साझेदार बनकर आगे आए।
                                                                                                                  28
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